
क़लअत अल-हिस्न (1), पश्चिम से · फ़ोटो: Gerhard Haubold · CC BY-SA 4.0 · Wikimedia Commons · दर्ज किया गया 1994
क्रैक दे शेवालिए
स्थानीय नाम: قلعة الحصن
क्रैक दे शेवालिए, अरबी में क़लअत अल-हिस्न, होम्स दर्रे में लगभग 650 मीटर ऊँची एक पहाड़ी पर, होम्स से लगभग 40 किलोमीटर पश्चिम में स्थित एक क़िला है। आज दिखाई देने वाला दुर्ग अधिकांशतः नाइट्स हॉस्पिटलर की कृति है, जिनके पास यह 1142 से 1271 तक रहा, और इसमें बाद में मामलूक परिवर्धन हुए। 2006 से यह क़लअत सलाह अद-दीन के साथ मिलकर यूनेस्को की एक क्रमिक विश्व धरोहर संपत्ति है।
इतिहास
इतिहासकार इब्न शद्दाद के अनुसार अलेप्पो और होम्स के मिरदासी अमीर ने 1031 में इस स्थल पर कुर्द सैनिकों को बसाया, इसी से इसका नाम हिस्न अल-अकराद, "कुर्दों का दुर्ग", पड़ा। जनवरी 1099 में टूलूज़ के रेमंड के अधीन प्रथम क्रूसेड की सेना का सामना इस दुर्ग से हुआ और उसने संक्षिप्त रूप से इस पर क़ब्ज़ा किया; स्थायी क्रूसेडर नियंत्रण 1110 में टैंक्रेड के अधीन आरंभ हुआ। 1142 में त्रिपोली के काउंट रेमंड द्वितीय ने इसे हॉस्पिटलरों को सौंप दिया।
हॉस्पिटलरों ने 1170 में भूकंप आने तक एक नया क़िला बनाया; जर्मन विकिपीडिया 1157 के एक भूकंप का भी उल्लेख करता है। 1201/02 के एक और भूकंप के बाद 13वीं शताब्दी का विस्तार हुआ, जिसने क़िले को उसका वर्तमान स्वरूप दिया। 1271 में सुल्तान बैबर्स ने एक बुर्ज के नीचे सुरंग खोदकर इस पर अधिकार किया; 8 अप्रैल को रक्षक सेना ने अपने ग्रैंड मास्टर के एक जाली पत्र से धोखा खाकर आत्मसमर्पण कर दिया। मामलूकों ने क्षति की मरम्मत की, और 1285 में क़लावून ने एक वर्गाकार बुर्ज जोड़ा।
उस्मानी काल में क़िले में जैनिसरियों की एक टुकड़ी रहती थी और यह एक कर-ज़िले का केंद्र था। 19वीं शताब्दी के अंत में इसके भीतर लगभग 500 लोगों का एक गाँव बस गया। 16 नवंबर 1933 को क़िला फ़्रांसीसी नियंत्रण में आया; ग्रामीणों को हटाकर मुआवज़ा दिया गया, और इसके बाद पियेर कूपेल के अधीन (जर्मन विकिपीडिया के अनुसार 1934–1936) सफ़ाई और जीर्णोद्धार हुआ। अंग्रेज़ी विकिपीडिया के अनुसार 1946 में स्वतंत्रता पर सीरिया ने नियंत्रण संभाला, जबकि जर्मन विकिपीडिया 7 फ़रवरी 1949 की एक संधि का हवाला देता है।[1][2]
वास्तुकला
क्रैक एक पर्वत-स्कंध (स्पर) क़िला है, जो 13वीं शताब्दी के विस्तार के बाद एक पूर्ण विकसित संकेंद्रित क़िला बन गया। 1142–1170 के भीतरी क़िले में थोड़े बाहर निकले वर्गाकार बुर्जों वाली एक परकोटा-दीवार थी। 13वीं शताब्दी में इसके पश्चिमी और दक्षिणी भागों को बड़े गोल बुर्जों वाला एक खड़ा ग्लेसिस दिया गया, जिनमें दक्षिण-पश्चिमी बुर्ज में ग्रैंड मास्टर रहते थे। नाइटों के कक्ष में गॉथिक जालीदार अलंकरण है, जो संभवतः 1230 के दशक का है।
लगभग 9 मीटर ऊँचे बाहरी घेरे में दूर तक बाहर निकले गोल बुर्ज और बक्सेनुमा मशीकुलेशन हैं, जो अलेप्पो के दुर्ग के कार्य से मिलते-जुलते हैं। उत्तर-पूर्वी द्वार से 137 मीटर लंबा एक मेहराबदार मुड़ा हुआ प्रवेश-मार्ग, जिसमें ऊपर से वार करने के छिद्र हैं, भीतरी प्रांगण तक चढ़ता है।[1][2]
उपयोग और महत्व
हॉस्पिटलरों के लिए क़िला एक सैन्य आधार और त्रिपोली काउंटी में उनकी संपत्तियों का प्रशासनिक केंद्र दोनों था। 13वीं शताब्दी के पूर्वार्ध में इसमें लगभग 2,000 की रक्षक सेना थी; यहाँ से नाइट हामा और होम्स से कर वसूलते थे और अभियान चलाते थे, उदाहरण के लिए 1230 और 1233 में हामा के विरुद्ध। 1218 में हंगरी के राजा एंड्रयू द्वितीय ने इसे "ईसाई भूमि की कुंजी" कहा।
1271 के बाद हॉस्पिटलर चैपल को दो मेहराबों (मिहराब) वाली एक मस्जिद में बदल दिया गया। जर्मन विकिपीडिया के अनुसार दुर्ग 19वीं शताब्दी के आरंभ तक सैन्य उपयोग में रहा; 1894 में ज़िला मुख्यालय तलकलख़ स्थानांतरित कर दिया गया। फ़्रांसीसी मैंडेट के अधीन यह लेवांत के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक बन गया।[1][2]
उल्लेखनीय विशेषताएँ
यह क़िला उन गिने-चुने स्थानों में से एक है जहाँ क्रूसेडर चित्रकला बची है: बाद के प्लास्टर के क्षरण के साथ 1935, 1955 और 1978 में भित्तिचित्र प्रकाश में आए, जिनमें चैपल के बाहरी भाग पर मंदिर में यीशु का समर्पण भी है। यूनेस्को क्रैक को सबसे अच्छी तरह संरक्षित क्रूसेडर क़िला और सैन्य संघों के मध्ययुगीन क़िले का आदर्श रूप बताता है।[1][2][3]
समयरेखा
- 1031
मिरदासी अमीर ने एक कुर्द सैन्य टुकड़ी बसाई; नाम हिस्न अल-अकराद।[1][2]
- 1142
त्रिपोली के रेमंड द्वितीय ने क़िला नाइट्स हॉस्पिटलर को सौंपा।[1][2][3]
- 1170
एक भूकंप से क़िला क्षतिग्रस्त, पहला निर्माण-चरण समाप्त।[1][2]
- 13वीं शताब्दी का आरंभ
- 1271
- 1933
फ़्रांस को हस्तांतरण, निवासियों का स्थानांतरण, इसके बाद जीर्णोद्धार।[1][2]
- 2006
क़लअत सलाह अद-दीन के साथ यूनेस्को विश्व धरोहर।[3]
- 2012–2014
गोलाबारी और हवाई हमलों से युद्ध-क्षति; मार्च 2014 में सरकारी बलों ने फिर से अधिकार किया।[1][2]
चित्र दीर्घा
3D प्रलेखन

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क्रैक दे शेवालिए
3D: Iconem · दर्ज 2016 · लाइसेंस: CC BY 4.0 · Sketchfab पर खोलें
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प्रलेखित स्थिति
जीर्णोद्धार जारी · 2024 तक
गृहयुद्ध के दौरान 2011/12 में विद्रोहियों ने क़िले पर क़ब्ज़ा किया। अगस्त 2012 में सीरियाई सेना की गोलाबारी से चैपल क्षतिग्रस्त हुआ; जुलाई 2013 और 18 अगस्त 2013 के हवाई हमलों से और क्षति हुई। मार्च 2014 में (जर्मन विकिपीडिया के अनुसार 20 मार्च को) सरकारी बलों ने क़िले और गाँव पर फिर से अधिकार कर लिया। संपत्ति 2013 से संकटग्रस्त विश्व धरोहर की सूची में है।
2016 और 2024 के बीच पेटर पाज़मानी विश्वविद्यालय के एक हंगेरियाई मिशन ने व्यापक जीर्णोद्धार का समन्वय किया, जिसमें चैपल के भित्तिचित्रों का संरक्षण, बैबर्स द्वार का पुनर्निर्माण तथा युद्ध और 2023 के भूकंप से हुई क्षति की मरम्मत शामिल थी।[1][2][3]
भ्रमण
यहाँ पहुँचना और ठहरना
होम्स प्रान्त में प्रलेखित सवारी, ठहराव और परिवहन सेवाएँ:
आसपास की चिकित्सा सेवाएँ
इस स्थल से सीधी दूरी। डेटा: OpenStreetMap, 2026-10-30 तक। संचालन स्थिति सत्यापित नहीं – जाने से पहले फ़ोन करें।
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स्रोत (21)
- Wikipedia (en): Krak des Chevaliers rev. 1370795669 · CC BY-SA 4.0 · 2026-10-30
- Wikipedia (de): Krak des Chevaliers rev. 270573480 · CC BY-SA 4.0 · 2026-10-30
- UNESCO World Heritage Centre: Crac des Chevaliers and Qal’at Salah El-Din · 2026-10-30
- Wikidata · CC0 · 2026-10-30
- Wikipedia (ar) · CC BY-SA 4.0 · 2026-10-30
- Wikipedia (el) · CC BY-SA 4.0 · 2026-10-30
- Wikipedia (es) · CC BY-SA 4.0 · 2026-10-30
- Wikipedia (fa) · CC BY-SA 4.0 · 2026-10-30
- Wikipedia (fr) · CC BY-SA 4.0 · 2026-10-30
- Wikipedia (id) · CC BY-SA 4.0 · 2026-10-30
- Wikipedia (it) · CC BY-SA 4.0 · 2026-10-30
- Wikipedia (ja) · CC BY-SA 4.0 · 2026-10-30
- Wikipedia (ko) · CC BY-SA 4.0 · 2026-10-30
- Wikipedia (nl) · CC BY-SA 4.0 · 2026-10-30
- Wikipedia (pl) · CC BY-SA 4.0 · 2026-10-30
- Wikipedia (pt) · CC BY-SA 4.0 · 2026-10-30
- Wikipedia (ru) · CC BY-SA 4.0 · 2026-10-30
- Wikipedia (sv) · CC BY-SA 4.0 · 2026-10-30
- Wikipedia (tr) · CC BY-SA 4.0 · 2026-10-30
- Wikipedia (zh) · CC BY-SA 4.0 · 2026-10-30
- OpenStreetMap · ODbL · 2026-10-30
Serielle Welterbestätte 1229 (Crac des Chevaliers und Qal'at Salah El-Din, 2006, Kriterien ii und iv, seit 2013 gefährdet); Qal'at Salah El-Din ist ein eigener Datensatz (Q277531). Widersprüche: (1) Besetzung 1099 – en: kurz im Februar 1099 besetzt, de: zehn Tage besetzt. (2) Erdbeben – en nennt 1170 (und 1202), de 1157 und 1170 (und 1201/02). (3) Übergabe an die Johanniter – en-Einleitung 1142, en-Text „zwischen 1142 und 1144“; UNESCO 1142. (4) Belagerung 1271 – en: Ankunft Baibars 3. März, Vorwerk 21. März, Bresche 29. März; de: Sultan ab 21. Februar, Vorwerk 22. März, Sturm auf den Zwinger 31. März; Kapitulation übereinstimmend 8. April – im Text nur die übereinstimmenden Angaben. (5) 1933 – en-Einleitung „an den französischen Alawitenstaat“, en-Text „unter Kontrolle des französischen Staates, betreut von der Académie des Beaux-Arts“, de „von Frankreich gekauft“. (6) Rückgabe an Syrien 1946 (en) gegen Vertrag vom 7. Februar 1949 (de). (7) Rückeroberung 2014: en „März 2014“, de „20. März 2014“. Der Restaurierungsabschnitt 2016–2024 beruht allein auf de-Wikipedia; Wikidata-Inception 1031 entspricht der ersten Befestigung, nicht dem heutigen Bau. Angaben zur Wiedereröffnung für Besucher (de, 2015) bewusst nicht übernommen.